মূল বিষয়বস্তুতে যান
সম্পাদকীয়

स्त्री को सहारे की नहीं, समान अवसर की जरूरत है

महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को पुरुषों के विरुद्ध खड़ा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां किसी का लिंग उसके अवसरों की सीमा न बने। स्त्री को सहारे की नहीं, समान अवसर की जरूरत है।

অনুবাদ শীঘ্রই আসছে. এই লেখাটি এখনও বাংলা ভাষায় পাওয়া যাচ্ছে না, তাই আপনি এটি हिन्दी ভাষায় পড়ছেন।

आत्मविश्वास से भरी भारतीय महिलाएं विभिन्न व्यवसायों में
ছবি: Photo: Gene Brutty / Unsplash

समाज के विकास का वास्तविक पैमाना केवल ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, आधुनिक तकनीक और आर्थिक समृद्धि नहीं है। किसी भी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से भी होना चाहिए कि वहां महिलाओं को कितना सम्मान, कितनी स्वतंत्रता, कितनी सुरक्षा और आगे बढ़ने के कितने अवसर उपलब्ध हैं। जिस समाज में आधी आबादी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाती, उस समाज का विकास कभी पूर्ण नहीं माना जा सकता।

आज की महिला बदलते भारत की एक महत्वपूर्ण तस्वीर है। वह घर की चारदीवारी से निकलकर शिक्षा, रोजगार, कारोबार, विज्ञान, प्रशासन, राजनीति, कला, खेल और सामाजिक सेवा जैसे लगभग हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। वह परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अनेक महिलाओं ने अपने संघर्ष, प्रतिभा और आत्मविश्वास के बल पर ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। लेकिन इस बदलाव के बावजूद तस्वीर का दूसरा पक्ष भी मौजूद है। आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षा, रोजगार, संपत्ति में अधिकार, सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वतंत्र निर्णय लेने के अवसरों से वंचित हैं। कई बार परिवार और समाज की अपेक्षाएं उनके सपनों से बड़ी हो जाती हैं। उनकी क्षमता पर भरोसा करने के बजाय उन्हें केवल सुरक्षा और सहारे की जरूरत समझ लिया जाता है। यही सोच बदलने की आवश्यकता है।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ यह नहीं कि महिलाओं को पुरुषों के विरुद्ध खड़ा किया जाए। इसका वास्तविक अर्थ ऐसी सामाजिक व्यवस्था तैयार करना है, जहां महिला और पुरुष दोनों को समान सम्मान, समान अवसर और अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने की स्वतंत्रता मिले। बराबरी का अर्थ हर परिस्थिति में एक जैसा व्यवहार नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां उपलब्ध कराना है जिनमें किसी व्यक्ति का लिंग उसके अवसरों की सीमा न बन जाए।

हमें यह भी समझना होगा कि महिला को आत्मनिर्भर बनाने की शुरुआत केवल नौकरी देने से नहीं होती। इसकी शुरुआत शिक्षा और निर्णय लेने की क्षमता से होती है। एक शिक्षित और जागरूक महिला अपने स्वास्थ्य, करियर, परिवार और भविष्य को लेकर बेहतर निर्णय ले सकती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता उसे अपने फैसलों में अधिक मजबूती देती है, जबकि कानूनी अधिकारों की जानकारी उसे अपने अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है।

परिवार की भूमिका भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेटियों को केवल सुरक्षित रखने की चिंता करने के बजाय उन्हें सक्षम बनाने पर ध्यान देना होगा। उन्हें यह विश्वास देना होगा कि वे अपनी पसंद का करियर चुन सकती हैं, असफल हो सकती हैं, दोबारा प्रयास कर सकती हैं और अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी बात रख सकती हैं। इसी तरह बेटों को भी बचपन से समानता, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना सिखाना जरूरी है।

महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते समय एक और महत्वपूर्ण पहलू है—महिला की अपनी इच्छा और उसकी स्वतंत्र पहचान। हर महिला की परिस्थितियां अलग होती हैं। किसी के लिए करियर प्राथमिकता हो सकता है, किसी के लिए परिवार, किसी के लिए कारोबार, सामाजिक सेवा या कला। सशक्तिकरण का अर्थ किसी एक तय भूमिका को आदर्श बनाना नहीं, बल्कि महिला को अपनी राह चुनने का अधिकार देना है।

इसी विचार के साथ इस अंक में हमने महिलाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया है। स्वास्थ्य से लेकर करियर तक, परिवार से लेकर कानून तक और संघर्ष से लेकर सफलता तक—यह अंक उन तमाम महिलाओं को समर्पित है जो परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय अपने जीवन की कहानी स्वयं लिख रही हैं। जरूरत इस बात की है कि हम महिलाओं को केवल अवसर देने की बात न करें, बल्कि अवसरों तक उनकी वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करें। उन्हें सहारे की आवश्यकता हो तो सहारा जरूर मिले, लेकिन उनकी पूरी पहचान किसी सहारे पर निर्भर न हो। उन्हें संरक्षण मिले, लेकिन उनकी स्वतंत्रता सीमित न हो। उन्हें सम्मान मिले, लेकिन सम्मान के बदले उनकी आवाज न छीनी जाए।

क्योंकि सशक्त महिला केवल अपने जीवन को नहीं बदलती, वह परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी बदल सकती है।

महिला मजबूत तभी नहीं होती जब वह सब कुछ अकेले संभाल ले; मजबूत तब भी होती है जब वह जरूरत पड़ने पर मदद मांगने का साहस रखती है।

— सुशीला अग्रहरि, संपादक
সব দেখুন