ਮੁੱਖ ਸਮੱਗਰੀ 'ਤੇ ਜਾਓ
ਰਿਸ਼ਤੇ

आप भी बन सकते हैं अच्छे पति

करियर और शादी के बीच उलझी महिलाओं के लिए जीवनसाथी का साथ सबसे बड़ा संबल है। लेखिका प्रीति शिनॉय, कबड्डी खिलाड़ी ममता पुजारी और कई कामकाजी महिलाएं बताती हैं कि सहयोगी पति ने उनके सपनों को कैसे पंख दिए।

ਅਨੁਵਾਦ ਜਲਦੀ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ. ਇਹ ਲੇਖ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਉਪਲਬਧ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਨੂੰ हिन्दी ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹ ਰਹੇ ਹੋ।

खुशहाल युवा दंपति
ਫੋਟੋ: Photo: SB Film Studio / Unsplash

मुझे अभी शादी नहीं करनी, अभी मेरा करियर सेट नहीं हुआ है। शादी के बाद पता नहीं क्या होगा, ससुराल वाले मुझे काम करने देंगे भी या नहीं और अगर करने भी देंगे तो मेरे साथ सहयोग करेंगे या नहीं, कैसे बना पाऊंगी मैं घर और करियर के बीच तालमेल, और फिर अभी तक मैंने अभिनव को जाना भी नहीं है, पता नहीं कैसा मिजाज है उनका, मेरा साथ देंगे या नहीं — बहुत डर रही थीं आयशा। तरह-तरह की बातें दिमाग में चल रही थीं।

पैरेंट्स कह रहे थे कि अब 28 की हो चली हो, अपना घर बसा लो। अभिनव अच्छे घर के हैं और पैकेज भी ठीक है। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि आयशा की ख्वाहिश थी कि जिससे वह शादी करें, वह दिखने में भी अच्छा हो। अभिनव को आकर्षक कहा जा सकता था। फिर भी आयशा कोई फैसला नहीं ले पा रही थीं। उन्हें तो लग रहा था कि जैसे ही शादी करेंगी, उनकी तरक्की ही रुक जाएगी।

उधेड़बुन में फंसी आयशा को जब उनकी भाभी ने समझाया कि यह सही समय है शादी करने का, तुम्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी, बस तुम एक बार अभिनव से मिल लो। जब आयशा और अभिनव की मुलाकात हुई और अभिनव ने उन्हें आश्वस्त किया कि जो तुम करना चाहो कर सकती हो, तुम्हें कोई नहीं रोकेगा, तो आयशा ने शादी के लिए हां कर दी। शादी के बाद उन्हें एक सहयोगी परिवार मिला और वह एक नए आत्मविश्वास के साथ अपने करियर में आगे बढ़ने लगीं। अगर कहीं कोई मुश्किल आती तो अभिनव गाइड और दोस्त की तरह उनके साथ हो जाते और हरसंभव मदद करते। शादी का यह स्वरूप तो उनकी कल्पना से ही परे था।

पति: पहले पाठक, पहले एडिटर

प्रीति शिनॉय एक जानी-मानी लेखिका हैं। उन्होंने 2006 से लिखना शुरू किया और आज देश के सर्वश्रेष्ठ युवा लेखकों में उनकी गिनती होती है। उनके ब्लॉग में उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उनके पति सतीश शिनॉय ने उन्हें किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। जब उनकी पहली किताब आई और उसकी पहली प्रति उन्होंने अपने पति को सौंपी तो पति को लगा कि जैसे उनका खुद का सपना पूरा हुआ है।

मेरे पति सतीश शिनॉय मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी हैं। 2006 से मैंने लिखना शुरू किया तो सतीश ने बहुत सपोर्ट किया। आज भी वे शाम को घर आने पर सबसे पहले यही पूछते हैं कि तुम्हारा आज का काम हो गया कि नहीं। बहुत करीब हैं हम। मेरे पति मेरी किताबों के पहले अध्याय के पहले पाठक और पहले एडिटर हैं। जो भी मैं लिखती हूं, सबसे पहले उन्हें ईमेल करती हूं। उनके विचार जानती हूं। जो बिंदु वे पकड़ते हैं उन्हें ठीक करती हूं। अगर उनका कोई महत्वपूर्ण मसला होता है तो वे मेरे विचार पूछते हैं। अपने आपको बेहद लकी मानती हूं। शादी को 18 से भी ज्यादा साल हो गए हैं, लेकिन सच कहूं तो आज भी पति जब शाम को घर आते हैं तो बहुत खुशी होती है। साढ़े पांच बजते-बजते उनसे पूछने लगती हूं कि कहां तक पहुंचे।

— प्रीति शिनॉय, लेखिका

शादी के बाद मिला अर्जुन अवार्ड

कबड्डी क्वीन के नाम से मशहूर अर्जुन पुरस्कार विजेता ममता पुजारी शादी के पहले से ही राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही हैं, लेकिन शादी के बाद पति का प्रोत्साहन पाकर खुद में और अधिक आत्मविश्वास महसूस करती हैं। कहती हैं, 2013 में मेरी जब शादी हुई तो भी मेरे घरवालों ने कहा कि अगर ससुराल वाले नहीं खेलने के लिए कहेंगे तो तुम्हें नहीं खेलना है। मैं इसके लिए तैयार हो गई थी। शादी के एक महीने बाद मेरा कैंप था। मैंने पति को कैंप के बारे में बताया तो उन्होंने कहा, तुम उसमें जाओ। भारत की टीम में यूं ही तो किसी को जगह नहीं मिलती। तुम अच्छा खेल रही हो। जब तक तुम्हें खेलना है, खेलो।

ममता बताती हैं कि उनके ससुराल वाले भी बहुत सहयोग करते हैं। अर्जुन अवार्ड भी शादी के बाद ही मिला। पहले उनके पति सिर्फ रेस देखते थे, लेकिन अब कबड्डी देखते हैं और उन्हें बताते हैं कि क्या करना चाहिए। काफी प्रोत्साहित करते हैं।

एक और एक मिलकर ग्यारह

शादी के बाद पति का साथ महिला के लिए एक संबल होता है और मौजूदा दौर में तो जीवनसाथी की सोच भी बदल गई है जिससे महिलाएं और सशक्त हुई हैं। आज के पति अपनी पत्नी की तरक्की में बराबर के भागीदार बनते हैं। पत्नी की कामयाबी उन्हें गौरव का अहसास कराती है। और एक बार जब महिला को पति व उनके परिवार का सम्मान और सहयोग मिल जाता है तो उसके सपने पंख लगाकर उड़ने लगते हैं और वह नई इबारत लिख देती है। चाहे प्रोफेशन भले ही अलग हों, वे एक-दूसरे की जरूरतों को समझते हैं और समस्याओं के समाधान में एक और एक मिलकर ग्यारह बन जाते हैं।

इंजीनियर आकांक्षा ने अपना कोर्स पूरा कर प्लेसमेंट के बाद शादी की और अब अपने करियर को पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ा रही हैं। वे बताती हैं, पहले मैं भी शादी के खिलाफ थी, लेकिन आज मुझसे कोई भी पूछेगा तो मैं कहूंगी कि शादी हजार मुश्किलों को हल कर देती है, बशर्ते दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझें।

शादी के बाद पहले दिन ही उन्होंने कहा कि तुम सिर्फ मेरी पत्नी नहीं हो। जीवन में हमारी बराबर की भागीदारी है। कभी मत सोचना कि मैं तुम पर हुक्म चला रहा हूं। उन्होंने मुझे करियर चुनने की पूरी आजादी दी। उन्होंने घर की जिम्मेदारी ले ली और मुझे कहा कि तुम अपनी मर्जी का काम करो। हम दोनों टेलीकॉम इंजीनियर हैं, लेकिन जब मैंने जाना कि मेरा पैशन मेकअप करना है तो मैंने अपने पति से बात की। उन्होंने कहा कि तुम जो करना चाहती हो, करो। मैंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली। अपनी जॉब पार्टटाइम कर ली। पति ने पूरा सहयोग किया।

ਸਾਰੇ ਵੇਖੋ