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मध्य प्रदेश

स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता

पहाड़ी इलाकों की फसल मानी जाने वाली स्ट्रॉबेरी को बैतूल जिले के ग्राम बटामा के युवा किसान नवनीत श्यामकिशोर वर्मा ने खुले खेत में जैविक तरीके से उगाकर परंपरागत खेती से ज्यादा मुनाफा कमाया।

अनुवाद लवकरच येत आहे. हा लेख अद्याप मराठी मध्ये उपलब्ध नाही, म्हणून तुम्ही तो हिन्दी मध्ये वाचत आहात.

ताजी स्ट्रॉबेरी
छायाचित्र: Photo: Tim Mossholder / Unsplash

म.प्र. में मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होने वाली स्ट्रॉबेरी को बैतूल जिले में उगाने के लिए एक किसान ने दो साल पहले जोखिम उठाया था। पहले साल तो निराशा हाथ लगी, लेकिन इस साल मौसम के बदलाव के चलते स्ट्रॉबेरी की बेहतर पैदावार होने से किसान को परंपरागत खेती से अधिक मुनाफा मिल रहा है।

बैतूल जिले में स्ट्रॉबेरी की पैदावार की संभावना बेहद कम होने के बाद भी ग्राम बटामा के किसान नवनीत श्यामकिशोर वर्मा ने उसकी जैविक खेती करने का मन बनाया। उन्होंने प्रायोगिक तौर पर पिछले साल दो एकड़ खेत में गन्ने की फसल के साथ स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए। जनवरी और फरवरी माह में गर्मी होने के कारण पौधों में फूल आ गए और खेत में स्ट्रॉबेरी की लालिमा है। कृषि स्नातक युवा किसान नवनीत की मानें, तो एक पौधे से कम से कम 500 से 700 ग्राम पकी हुई स्ट्रॉबेरी निकल रही है। पूरी तरह से जैविक पद्धति से खेती करने के कारण वे इसकी पैकिंग कर जिले ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के बाजार तक पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी क्षेत्र का पौधा है और पॉली हाउस में ही उसकी पैदावार सही होती है। इसके बावजूद उन्होंने खुले खेत में स्ट्रॉबेरी की फसल करने का जोखिम उठाया था। पहले दौर में 350 पौधे खरीदकर खेत में लगाए, लेकिन पाला पड़ने से पौधों की वृद्धि थम गई थी। जैविक पोषक तत्वों की मदद से उन्होंने पौधों को बीमारी और जाले से बचाया और अब उनसे भरपूर उत्पादन हासिल हो रहा है। परंपरागत खेती से हटकर नवनीत ने अब अपने खेत में लीची की खेती करने का निर्णय लिया है।

नवनीत ने बताया कि पौधों को धूप से बचाने के लिए नेट लगाई है, जिससे फल खराब नहीं हो रहे हैं। उनके खेत में स्ट्रॉबेरी के पौधों से पूरी तरह जैविक स्ट्रॉबेरी की पैदावार हो रही है। इसे वे आधा किलो के एयर टाइट पैकेट में पैक कर बाजार में पहुंचा रहे हैं। बाजार में उनकी जैविक स्ट्रॉबेरी 300 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।

सर्व पहा