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അഭിമുഖം

संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है — सुश्री भूरिया

विशेष साक्षात्कार: महिला व बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने केयर लीवर्स, मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना, मिशन वात्सल्य और एम्स भोपाल के साथ हुए एमओयू पर खुलकर बात की।

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महिला व बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया एक कार्यशाला में संबोधित करती हुईं
ഫോട്ടോ: स्त्री विमर्श पत्रिका

महिला व बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि बाल देखरेख संस्थाओं से निकलने वाले बच्चे और केयर लीवर्स केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं, बल्कि अपने भविष्य के निर्माता हैं। सरकार का प्रयास है कि कोई भी बच्चा संरक्षण की व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद स्वयं को अकेला न समझे, बल्कि शिक्षा, कौशल, रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता के अवसरों के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि “संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है।”

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कैटलिस्ट्स फॉर सोशल एक्शन (CSA) के सहयोग से पिछले दिनों एक कार्यशाला बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं केयर लीवर्स को लेकर आयोजित हुई। इसमें महिला व बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है। उन्होंने और भी कई तरह से अपने उद्गार व्यक्त किए। प्रस्तुत हैं सुश्री भूरिया से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के प्रमुख अंश।

प्रश्न — मप्र में ऐसे बच्चे जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं हो, आपके पास ऐसी क्या योजना है, जिससे ऐसे बच्चों को मदद मिल सके? केयर लीवर्स के बारे में डिटेल बताएं।

उत्तर — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयास व मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं से बाहर आने वाले बच्चों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। योजना को और सरल बनाने तथा उसका दायरा बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे और युवा इसका लाभ प्राप्त कर सकें। उन्हें शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक सहयोग मिल सके। मिशन वात्सल्य के माध्यम से शासन की प्रतिबद्धता है कि कोई भी बच्चा केवल संरक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि उसे सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का पूरा अधिकार मिले।

प्रश्न — केयर लीवर्स की क्या भूमिका होती है? प्रदेश में इसे किस तरह से मॉनिटर किया जाता है? आने वाले दिनों में इसे लेकर क्या योजना है?

उत्तर — मेरी कोशिश है कि केयर लीवर्स अपने अतीत से नहीं, संकल्प और उपलब्धियों से पहचान बनाएं। चूंकि संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है। चूंकि बाल देखरेख संस्थाओं से निकलने वाले बच्चे और केयर लीवर्स केवल परिस्थितियों के शिकार नहीं, बल्कि अपने भविष्य के निर्माता हैं। सरकार का प्रयास है कि कोई भी बच्चा संरक्षण की व्यवस्था से बाहर निकलने के बाद स्वयं को अकेला न समझे, बल्कि शिक्षा, कौशल, रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता के अवसरों के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, सफलता उससे बड़ी हो सकती है। मध्यप्रदेश के केयर लीवर्स अपनी मेहनत और प्रतिभा से प्रदेश ही नहीं, देश और विदेश में भी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना की वर्दी में अपने बच्चों को देखकर गर्व की अनुभूति होती है। इन युवाओं की उपलब्धियां बताती हैं कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर परिस्थितियां किसी की सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।

प्रश्न — ऐसे बच्चों के लिए महिला व बाल विकास विभाग के पास और क्या योजना है? ऐसे बच्चों को शिक्षा के बाद रोजगार से कैसे जोड़ा जाए, इसे लेकर क्या योजना है?

उत्तर — उनकी कोशिश है कि ऐसे बच्चे नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले युवा बनें। इसीलिए युवाओं से एकजुट रहने और अपने साथियों की मदद करने का आह्वान किया है। जिस युवा को रोजगार का अवसर मिले, वह अपने अन्य साथियों को भी आगे बढ़ाने में सहयोग करे। आपको रोजगार मिले, यह अच्छी बात है, लेकिन इससे भी बेहतर होगा कि आप स्वयं दूसरों को रोजगार देने की स्थिति में पहुंचें। मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना का दायरा बढ़ रहा है।

प्रश्न — मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के बच्चों का हुनर संवारने की क्या योजना है? विभाग इसके लिए क्या कर रहा है? किस तरह से उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम चल रहा है?

उत्तर — बच्चों के हुनर को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों द्वारा तैयार किए गए जूट बैग, कलाकृतियों और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके लिए बच्चों के हुनर की सराहना करते हुए इन उत्पादों को बाजार से जोड़ने तथा स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। क्योंकि बच्चों को केवल कौशल का प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके हुनर को बाजार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम होना चाहिए। इसीलिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं विभिन्न संस्थाओं के साथ इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों को लेकर भी योजना है। करियर मार्गदर्शन, भविष्य की कार्ययोजना, मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक आवश्यकताओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की जा रही है।

प्रश्न — सीएसए की भूमिका क्या है? विभागीय समन्वय किस तरह से हो रहा है? इस बारे में भी कुछ बताएं।

उत्तर — आफ्टर केयर सेवाओं के क्षेत्र में सीएसए की ओर से किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग और सीएसए के बेहतर समन्वय से केयर लीवर्स के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। सीएसए की सीईओ सुश्री स्मिता शेट्टी और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुश्री श्वेता मोदी सहित पूरी टीम के प्रयास सराहनीय हैं। विभागीय दौरों में केयर लीवर्स से संवाद करती हैं। उनमें आगे बढ़ने तथा अपने लक्ष्य हासिल करने की ऊर्जा और उत्साह देखकर प्रसन्नता होती है। सरकार महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से केयर लीवर्स के मार्गदर्शन, सहयोग और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रश्न — महिला सशक्तिकरण योजनाओं को नई रफ्तार देने की क्या योजना है? किस तरह से नए सेटअप में काम हो रहा है? इस बारे में कुछ डिटेल बताएं।

उत्तर — अधिकारियों के सेटअप में फेरबदल के निर्देश दिए गए थे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण तथा संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। इसीलिए द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारियों, यानी विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारियों के पदों के पारदर्शी और सुचारू व्यवस्थापन के लिए तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए थे। चूंकि विभाग के लगातार बढ़ते कार्यक्षेत्र और नवीन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए मैदानी अमले की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। एकीकृत बाल विकास सेवा और महिला सशक्तिकरण संचालनालय के एकीकरण के बाद भी योजनाओं के दायरे में कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि कई नई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार मैदानी अमले का प्रभावी उपयोग राज्य सरकार की प्राथमिकता है, जिससे जमीनी स्तर पर पर्यवेक्षण और क्रियान्वयन को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

प्रश्न — नए सेटअप और प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था क्या है? इसे कैसे समायोजित किया गया है?

उत्तर — प्रशासनिक पुनर्व्यवस्थापन की इस योजना के तहत विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारियों के पदों को संचालनालयों, महिला-बाल संरक्षण संस्थाओं, संभागीय व जिला कार्यालयों, क्षेत्रीय समन्वय कार्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों के सेटअप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न आयोगों और निगमों में आवश्यकतानुसार कतिपय पदों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) के लिए आरक्षित रखने की व्यवस्था भी की गई है। संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पदों के प्रतिस्थापन, प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षण और सेटअप में शामिल करने की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी कराएं।

प्रश्न — महिला व बाल विकास विभाग में भर्ती नियमों की समीक्षा के बाद उसके दूरगामी प्रभाव क्या पड़े हैं?

उत्तर — विभाग को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए विभागीय भर्ती नियमों की समीक्षा करने तथा विभागीय सेटअप को सुव्यवस्थित करने के भी आदेश दिए गए थे। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल विभागीय तालमेल में सुधार होगा, बल्कि मैदानी स्तर पर निगरानी मजबूत होने से कुपोषण नियंत्रण, बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के सकारात्मक परिणाम और अधिक प्रभावी ढंग से सामने आए हैं।

प्रश्न — मप्र में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारने की एम्स की तकनीक क्या है? उससे किस तरह से फायदे मिले हैं?

उत्तर — महिला-बाल विकास और एम्स के मध्य एमओयू हुआ है। इससे फ्रंटलाइन वर्कर्स को स्पेशल ट्रेनिंग देना शुरू किया गया है। प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गांवों तक मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर बदलने वाली है। महिला बाल विकास विभाग और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मध्य एमओयू से एम्स की हाईटेक तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ सीधे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलेगा। इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की सटीक पहचान और त्वरित इलाज के लिए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर की ओर से स्पेशल क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाएगी।

प्रश्न — डेटा-संचालित निर्णय और फ्रंटलाइन वर्कर्स का सशक्तिकरण किस तरह से हो रहा है? इस बारे में भी कुछ बताएं।

उत्तर — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों और महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य व संपूर्ण पोषण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। एम्स भोपाल की तकनीकी विशेषज्ञता से हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स और आंगनवाड़ी केंद्रों को नई मजबूती मिलेगी, जिससे नीतिगत स्तर पर सटीक और डेटा-संचालित निर्णय लिए जा सकेंगे। यह एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित ‘स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ व ‘स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट’ के बीच हुआ है। इस साझेदारी के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी टीम की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स और परियोजना अधिकारियों को विशेष तकनीकी और चिकित्सा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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