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അടുക്കള

सब्जियों का राजा आलू

भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक आलू के पोषक गुण, उसकी खेती के लिए सही जलवायु, तापमान और मिट्टी, और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला द्वारा विकसित कुफरी किस्मों की पूरी जानकारी।

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ताजे आलू
ഫോട്ടോ: Photo: JESHOOTS.COM / Unsplash

आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। भारत में शायद ही कोई ऐसा रसोईघर होगा जहाँ पर आलू ना दिखे। इसकी मसालेदार तरकारी, पकौड़ी, चाट, पापड़, चिप्स जैसे स्वादिष्ट पकवानों के अलावा अंकल चिप्स, भुजिया और कुरकुरे भी हर जवां के मन को भा रहे हैं। प्रोटीन, स्टार्च, विटामिन सी और के के अलावा आलू में अमीनो अम्ल जैसे ट्रिप्टोफेन, ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन आदि काफी मात्रा में पाये जाते हैं जो शरीर के विकास के लिए आवश्यक हैं। आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसल है। तमिलनाडु एवं केरल को छोड़कर आलू सारे देश में उगाया जाता है। किसान आज से लगभग 7000 साल पहले से आलू उगा रहे हैं।

जलवायु

आलू के लिए छोटे दिनों की अवस्था आवश्यक होती है। भारत के विभिन्न भागों में उचित जलवायु की उपलब्धता के अनुसार किसी न किसी भाग में सारे साल आलू की खेती की जाती है। बढ़वार के समय आलू को मध्यम शीत की आवश्यकता होती है। मैदानी क्षेत्रों में बहुधा शीतकाल (रबी) में आलू की खेती प्रचलित है। आलू की वृद्धि एवं विकास के लिए इष्टतम तापक्रम 15-25 डिग्री सेल्सियस के मध्य होना चाहिए। इसके अंकुरण के लिए लगभग 25 डिग्री सेल्सियस, संवर्धन के लिए 20 डिग्री सेल्सियस और कन्द विकास के लिए 17 से 19 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता होती है। उच्चतर तापक्रम (30 डिग्री सेल्सियस) होने पर आलू विकास की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अक्टूबर से मार्च तक, लम्बी रात्रि तथा चमकीले छोटे दिन आलू बनने और बढ़ने के लिए अच्छे होते हैं। बदली भरे दिन, वर्षा तथा उच्च आर्द्रता का मौसम आलू की फसल में फफूँद व बैक्टीरिया जनित रोगों को फैलाने के लिए अनुकूल दशाएं हैं।

भूमि

आलू को क्षारीय मृदा के अलावा सभी प्रकार की मृदाओं में उगाया जा सकता है, परन्तु जीवांश युक्त रेतीली दोमट या सिल्टी दोमट भूमि इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम है। भूमि में उचित जल निकास का प्रबंध अति आवश्यक है। मिट्टी का pH मान 5.2 से 6.5 अत्यंत उपयुक्त पाया गया है। जैसे-जैसे यह pH मान ऊपर बढ़ता जाता है, दशाएं अच्छी उपज के लिए प्रतिकूल हो जाती हैं।

आलू के कंद मिट्टी के अन्दर तैयार होते हैं, अतः मिट्टी का भली भांति भुरभुरा होना नितांत आवश्यक है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें, दूसरी और तीसरी जुताई देसी हल या हैरो से करनी चाहिए। यदि खेत में ढेले हों तो पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। बुवाई के समय भूमि में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। यदि खेत में नमी की कमी हो तो खेत में पलेवा करके जुताई करनी चाहिए।

आलू की किस्में

विदेशी किस्में: कुछ विदेशी किस्मों को भारतीय परिस्थितियों के लिए अनुकूल किया गया है, जिनमें कुछ के नाम नीचे दिए गए हैं — अपटुडेट, क्रेग्स डिफेंस, प्रेसिडेंट आदि।

केन्द्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान, शिमला द्वारा विकसित किस्में:

  • कुफरी चन्द्रमुखी — 80-90 दिन में तैयार, 200-250 क्विंटल उपज।
  • कुफरी अलंकार — 70 दिन में तैयार हो जाती है। यह किस्म पछेती अंगमारी रोग के लिए कुछ हद तक प्रतिरोधी है। यह प्रति हेक्टेयर 200-250 क्विंटल उपज देती है।
  • कुफरी बहार 3792 E — 90-110 दिन में, लम्बे दिन वाली दशा में 100-135 दिन में तैयार।
  • कुफरी नवताल G 2524 — 75-85 दिन में तैयार, 200-250 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी ज्योति — 80-120 दिन में तैयार, 150-250 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी शीतमान — 100-130 दिन में तैयार, 250 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी बादशाह — 100-120 दिन में तैयार, 250-275 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी सिंदूरी — 120 से 140 दिन में तैयार, 300-400 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी देवा — 120-125 दिन में तैयार, 300-400 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी लालिमा — यह शीघ्र तैयार होने वाली किस्म है जो 90-100 दिन में तैयार हो जाती है। इसके कंद गोल, आँखें कुछ गहरी और छिलका गुलाबी रंग का होता है। यह अगेती झुलसा के लिए मध्यम अवरोधी है।
  • कुफरी लवकर — 100-120 दिन में तैयार, 300-400 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।
  • कुफरी स्वर्ण — 110 दिन में तैयार, 300 क्विंटल/हेक्टेयर उपज।

संकर किस्में:

  • कुफरी जवाहर JH 222 — 90-110 दिन में तैयार। यह खेतों में अगेता झुलसा और फोम रोग की प्रतिरोधी किस्म है। यह 250-300 क्विंटल उपज देती है।
  • E 4,486 — 135 दिन में तैयार, 250-300 क्विंटल उपज। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्य प्रदेश में उगाने के लिए उपयोगी।
  • JF 5106 — उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयोगी, 75 दिनों की फसल, उपज 23-28 टन/हेक्टेयर मिल जाती है।
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