ప్రధాన కంటెంట్‌కు వెళ్ళండి
ఆరోగ్యం

सावधान! ट्रैफिक जाम दे रहा है एड़ी और कमर का दर्द

घंटों के ट्रैफिक जाम में ड्राइव करने से कमर, गर्दन, एड़ियों और पैरों में दर्द आम हो गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सही पोस्चर, स्ट्रेचिंग और नियमित व्यायाम से इससे राहत पाई जा सकती है।

అనువాదం త్వరలో వస్తుంది. ఈ వ్యాసం ఇంకా తెలుగులో అందుబాటులో లేదు, అందుకే మీరు దీన్ని हिन्दीలో చదువుతున్నారు.

कार चलाते समय कमर दर्द से परेशान व्यक्ति
ఫోటో: Photo: Shreyas Jha / Unsplash

ड्राइविंग करने वाले लोगों को कमर दर्द, गर्दन में दर्द, एड़ियों और पैरों में दर्द आम हो गया है। लेकिन यह दर्द केवल ड्राइविंग के कारण नहीं है। यह दर्द उनको ज्यादा परेशान कर रहा है कि जो घंटों के जाम में ड्राइव करके घर से ऑफिस और ऑफिस से घर का सफर तय करते हैं। जाम के चलते कुछ समय का रास्ता भी कई घंटों में तय होता है। ऐसे में काफी समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने, बार-बार क्लच व ब्रेक मारने से धीरे-धीरे ही सही लेकिन इसका असर सेहत पर पड़ने लगता है। लोगों में इससे पैर और एड़ियों में दर्द की समस्या आम हो गई है। कई मामलों में कमर दर्द की शिकायत भी सामने आई है।

लगातार सामने देखने के चलते गर्दन का दर्द भी लोगों प्रमुख समस्या बनता जा रहा है। लोग भी अब इसके आदि भी बनते जा रहे हैं। शुरुआत में वह समझ भी नहीं पाते, लेकिन बाद में यह बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है। यह दिक्कत अब 20 से 40 वर्ष के युवाओं में आ रही है। लोग कहते हैं कि ड्राइविंग जीवनशैली का एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए इसे छोड़ना संभव नहीं है।

रूट्ट में कार्यरत सुमित रोजाना गुड़गांव से नोएडा जाते हैं। उन्होंने बताया कि वह साढ़े 3 से 4 घंटे रोजाना ड्राइव करते हैं। जाम में समय बढ़ता है। इससे अब पैरों में दर्द होता है। प्राइवेट फर्म में काम करने वाली सुकृति ठाकुर का कहना है कि घर से ऑफिस की दूरी 20 किलोमीटर की है, लेकिन इस दूरी को तय करने में कभी डेढ़ से पौने दो घंटे लग जाते हैं। ऐसे में कमर दर्द की परेशानी उन्हें धीरे-धीरे होने लगी है।

ट्रैफिक में ड्राइव करने से बढ़ रही परेशानी फोर्टिस हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक डॉ. जयंत अरोड़ा ने बताया कि लॉन्ग ड्राइविंग परेशानी का कारण नहीं है, लेकिन कुछ किलोमीटर की दूरी को ट्रैफिक के साथ पार करना परेशानी का सबब बन रहा है। जाम में लगातार ड्राइविंग करने से हाथों और गर्दन का दर्द सर्वाइकल का रूप ले सकता है। वहीं, लगातार एक स्थिति में बैठे रहते से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन स्लो पड़ जाता है। जिसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

मानसिक रूप से भी पढ़ रहा प्रभाव शोर और ट्रैफिक के बीच सफर करने से लोगों पर मानसिक असर भी पड़ रहा है। चिड़चिड़ापन आम हो गया है, जिसका असर काम पर होता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह पर दें ध्यान: गुड़गांव के सिविल हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ पंकज अग्रवाल कहते हैं, कार की सीट को ठीक से एडजस्ट कर के बैठने से पीठ का पोस्चर सही रहता है। जिससे रीढ़ पर कम तनाव पड़ता है। वहीं जीवनशैली को बदलना भी बहुत जरूरी है।

योग एक्सपर्ट पूनम विमरा का कहना है, एक्सरसाइज से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। ड्राइविंग के दौरान बीच-बीच में शरीर को स्ट्रेच कर तनाव को कम किया जा सकता है। हालांकि, समस्या गंभीर है तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

ऐसे पा सकते हैं राहत

  • कारपूलिंग से शरीर को आराम दिया जा सकता है
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और रनिंग
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग ज्यादा सही है
  • ड्राइविंग के दौरान बीच-बीच में बॉडी को स्ट्रेच जरूर करें
  • कमर और गर्दन को सही पोस्चर रखने पर कम होगी परेशानी
అన్నీ చూడండి