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कंप्यूटर कर रहे हैं आपकी नौकरी का फैसला

ऑनलाइन गेम, वीडियो इंटरव्यू और एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम — कंपनियां अब कर्मचारियों को नौकरी पर रखने में डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही हैं, और आमने-सामने की मुलाकात की अहमियत घटती जा रही है।

ಅನುವಾದ ಶೀಘ್ರದಲ್ಲೇ ಬರಲಿದೆ. ಈ ಲೇಖನ ಇನ್ನೂ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಲಭ್ಯವಿಲ್ಲ, ಆದ್ದರಿಂದ ನೀವು ಇದನ್ನು हिन्दीಯಲ್ಲಿ ಓದುತ್ತಿದ್ದೀರಿ.

भीड़ के बीच चुने गए उम्मीदवारों का समूह
ಫೋಟೋ: Photo: LinkedIn Sales Solutions / Unsplash

खिली हुई धूप में एक नौजवान पार्क में बेंच पर बैठा है। फिर एक चिड़िया उड़ती हुई निकलती है और पेड़ से एक पत्ती गिरती है। लेकिन तभी एक साथ बहुत सी बातें होती हैं। एक दोस्त उस युवक को छुट्टी में कहीं चलने को कहता है, एक दोस्त उसे एक कॉफी शॉप में नौकरी की पेशकश करता है और उसके बाद कई लोग अपने मोबाइल फोन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए मदद मांगते हैं।

इस परिदृश्य में ये युवक क्या कुछ करता है, उसी से तय होगा कि उसे नौकरी मिलनी चाहिए या फिर वो पार्क की बेंच पर ही बैठा रहेगा। हालांकि पत्तियां गिरेंगी लेकिन इस युवक को शरद ऋतु की ठंडक का अहसास नहीं होगा क्योंकि ये एक 'अवतार' है, एक कार्टून किरदार जो किसी संभावित कर्मचारी की योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए तैयार किया गया है।

खुद को 'टैलेंट कंसलटेंसी' कहने वाले कैमेस्ट्री ग्रुप नाम की कंपनी ने ये ऑनलाइन गेम तैयार किया है ताकि टेलीकॉम कंपनी ओ2 अपने संभावित कर्मचारियों की योग्यता का विश्लेषण कर सके। ये सिर्फ इकलौता सॉफ्टवेयर नहीं है जो कंपनियों में लोगों को नौकरी पर रखने की प्रक्रिया में बढ़ते डिजिटल प्रभाव को दिखाता है। एसएचएल नाम की एक कंपनी ने एक ऑनलाइन 3डी प्रोग्राम तैयार किया है जिसमें नौकरी के इच्छुक व्यक्ति के सामने घूरता हुआ एक बॉस प्रकट होता है और कई मुश्किल दुविधा वाली स्थितियों के हल पूछता है।

वहीं एनरिक्रूट एक वीडियो आधारित इंटरव्यू उत्पाद है जो नौकरी के इच्छुक लोगों के सामने ऑनलाइन वेब कैमरे के जरिए सिर्फ तीन सवाल रखता है। इससे नियोक्ता फैसला कर सकता है कि उसे किस व्यक्ति से मिलना है और किससे नहीं।

बीआईए ग्रुप में रिक्रूटमेंट कंसलटेंट गॉर्डन व्हाइट कहते हैं, आमने सामने बैठ कर किए जाने वाले इंटरव्यू दोनों ही पक्षों के लिए बहुत खर्चीले और वक्त लेने वाले होते हैं। अब ऐसे इंटरव्यू नौकरी पर रखने के लिए आखिरी दौर के लिए ही होंगे। लेकिन वो ये नहीं मानते कि नियोक्ता की संभावित कर्मचारी से मुलाकात की अहमियत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

कंपनियां पहले ही 'एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम' इस्तेमाल कर रही हैं जो नौकरी के इच्छुक लोगों के सीवी का विश्लेषण करते हैं। व्हाइट बताते हैं, कोई भी अब 500 सीवी नहीं पढ़ता है- अब ये सब काम ऑटोमेटिक होता है। वो बताते हैं, अगर नौकरी के इच्छुक लोगों को पता चल जाए कि कंपनी उनके सीवी की छंटनी के लिए कौन सा टूल इस्तेमाल कर रही है तो वो अपना सीवी संभावितों में शामिल कराने के लिए काफी कुछ कर सकते हैं।

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